
A | राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। (Income Growth Per Capita Income): दिल्ली में जनसंख्या बढ़ने के साथ ही यहां के लोगों की आय भी बढ़ी है। शहरी क्षेत्र का विस्तार होने से यहां की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी कम हुई है। इसकी तुलना में सेवा क्षेत्र व औद्योगिक इकाइयों की संख्या बढ़ी है।,यही कारण है कि दिल्ली तीन सबसे संपन्न राज्यों में शामिल है। यहां प्रति व्यक्ति आय 4.93 लाख रुपये है। इससे आगे सिर्फ सिक्किम है। सिक्किम में प्रति व्यक्ति 5.87 लाख है। वर्ष 2022-23 में गोवा दूसरे स्थान पर था। पिछले दो वर्षों से उसका आंकड़ा जारी नहीं हुआ है। केंद्र शासीत प्रदेश में दिल्ली सबसे अागे है। इसके बाद चंडीगढ़ है। वर्ष 2011-12 में दिल्ली की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी 3.5 प्रतिशत तक थी। अब यह एक प्रतिशत से भी कम रह गया है। इस दौरान निर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 13 प्रतिशत बनी हुई है। वहीं, सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी 83.4 प्रतिशत से बढ़कर 86.6 प्रतिशत हो गई है। इससे लोगों की आय बढ़ी है। महाराष्ट्र, गुजरात जैसे राज्य जहां की जनसंख्या अधिक होने के साथ ही उद्योग को भी बढा़वा मिला है। इसके बाद भी वह प्रति व्यक्ति आय में दिल्ली से पीछे हैं।,दिल्ली में प्रति व्यक्ति आय देश की औसत प्रति व्यक्ति आय से 2.4 गुना अधिक है। राज्य सरकार के आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार प्रति व्यक्ति आय में सात प्रतिशत से अधिक की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, यह राष्ट्रीय औसत से कुछ कम है।,इसे और बढ़ाने के लिए सेवा व पर्यावरण अनुकूल औद्योगिक इकाइयों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। रिपोर्ट में सिर्फ पंजीकृत औद्योगिक इकाइयों को शामिल किया गया है। यहां आवासीय क्षेत्रों में बड़ी संख्या में अवैध औद्योगिक इकाइयां चल रही हैं। इन्हें औद्योगिक क्षेत्रों में स्थानांतरित करने की आवश्यकता है। इससे दिल्ली की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। दिल्ली सरकार ने इसी सप्ताह स्टार्टअप पालिसी का ड्राफ्ट घोषित किया है। अगले 10 वर्षों में दिल्ली को इनोवेशन हब बनाने का लक्ष्य रखा गया है। निजी भागीदारी से औद्योगिक क्षेत्रों के विकास करने का निर्णय लिया गया है। पर्यटन क्षेत्र को भी बढ़ावा देने की नीति तैयार की जा रही है। इससे आने वाले वर्षों में यहां रोजगार के अवसर बढ़ेगें।

B | 选择中等层次的普高进行贯通培养,是有良苦用心的。因为如果选择当地的优质高中、顶尖高中贯通培养,就很可能变为这些高中“掐尖”,家长会争着让孩子进入顶尖高中的贯通班,进一步刺激升学竞争。 正是因为如此,成都设计的贯通培养,试点范围并不大,由学生自主申请,不进行考试选拔,报名人数超过招生计划则进行摇号录取。在求学过程中,贯通班的学生还可以申请退出,但“只出不进”。试点这样的贯通培养,对选择贯通班的学生来说,相当于有了进普高的保底,贯通班可以进行小初高一体化培养,关注学生的综合素质。

C | 但这并不会影响整体中考格局,大部分初中毕业生还将参加中考。

D | 选择贯通班的学生,如果想报考更好的普高,也可能退出贯通班。

E | 不少人希望贯通培养模式能扩大,这样就可以让更多学生不参加中考了。但这是受到现实局限的。扩大贯通培养及取消中考的难点都在于,除了高中阶段实行普职分流外,我国普通高中体系内仍存在事实上的等级差异,诸如超级高中、示范性高中、特色高中等多种类型,其资源配置和升学前景差异显著。

F | 高中阶段的普职分流受到关注,但很快就不再是问题。我国的普职比已经超过7:3,不久将达到8:2。按照出生人口变化与普高办学规模,到2034年,我国所有适龄学生都可以上普高(如果不强制保留中职的话),实现普及普高。但普及普高就意味着取消中考吗?并不是,如果普高存在不同的等级,怎么取消中考?我国义务教育均衡化已经推进了20多年,迄今还有“幼升小”“小升初”择校热,何况高中本就设有重点高中、示范高中。拿北京来说,取消中考,用摇号方式进人大附中吗? 这就需要调整高中阶段教育发展战略。切实推进高中阶段教育多样化、均衡化发展,适时取消重点高中制度,这是进入教育普及化时代的必然选择。耐人寻味的是,很多人呼吁取消中考,但又反对取消重点高中制度,那么,怎么实现取消中考,减轻学生考试压力的目标?难道让每所重点高中都实行贯通培养吗?这不是让“幼升小”择校热更热吗? 另外,在高中普及化时代,发展中职教育的思维也应调整,不是采取单设职业学校的方式,而是把职业教育融入到普通高中,建设融普高课程与技职课程于一体的综合高中。综合高中是比普高更高水平的高中,一是开设课程更多,二是实行学分制教学,由学生自主选择普高与技职课程。办好高水平综合高中,关键在于要重视技职课程建设,并给选择技职课程的学生平等的升学选择。这也是美国、加拿大、英国的高中教育方式,由于所有高中都是综合高中,且高中均衡发展,因此不存在中考的问题,所有学生都免试进入高中阶段学习。 简言之,贯通式培养是当前中考框架的培养模式改革,只能起到有限的作用,学生(家长)可根据自身情况,选择贯通培养;要扭转基础教育的应试化,需要把均衡化从义务教育推进到高中教育,并在高中教育中推进普职融通。
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Published on:01:33:51